शोभित की कवितायेँ

शोभित  कविता के साथ अपने अफेयर की शुरुआत में है. हम अपना सफर जब शुरू करते हैं , हमारे साथ हमारा उत्साह और उम्मीद ही होते हैं और सामने एक बड़ी दुनिया जिसको लिख देने का मन होता है. ये उत्साह ताउम्र ज़रूरी होता है.
शोभित रंगकर्मी भी है और नाटकों को भी जीता है. आज उसकी तीन कवितायेँ -

1.
खुदरे सिक्के की हालत है
क़ैद बयां कैसे करूँ
ज़ेेब ही महफ़िल है 
खुद के पैर नहीं,
छनक औरों के क़दमों से 
गुल्लक की क़ैद मिले तो रह भी लूं
यहाँ तो टॉफियां लूटा दी जाती है
मेरी गुलामी क़ायम रखने के लिए
बाज़ार की बिक्रियां तेज़ होने को है
खूब होगी तरफ़दारी ऐ नोट तेरी
मैं तो पसंदीदा रहूँगा बस फ़क़ीरों का
शाम की तख़्त से फेंक दिया जाऊंगा नदी में
किसी की मन्नत का बोझ लिए ।।
2.
उस वक़्त को खोज लो
ज़रा सा वक़्त लेकर
जिस वक़्त के लिए हो बने 
तुम हर वक़्त आलमगीर
कुछ अलग तो होगा ही 
तुम हो किनारा मैं बहता नीर
न मिले वो वक़्त तो छोड़ो
खोज लो उस आग को
जिससे सुलगती सांस है
फिर दिसंबर आ रहा है
बैठ जाना तुम किनारे
मैं बहूँगा सुलगता नीर ।
3.
हर ख़बर रखता हूँ चाँद का
रात के ओझल होने तक
एक पंछी मेरी ओर से 
मेरे मन का वो कोलंबस
उड़ता चला जाता है जो
रास्ते भटके हुए
वो पहुँच जाता है तुम तक
चाँद की तलाश में
मैं, 
हर ख़बर रखता हूँ चाँद का
रात के ओझल होने तक
हाँ वो लौटेगा कभी 
अपने साथ तुमको लिए ।
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Comments

  1. ha lautega vo liye sath usko
    mana raste mushkil hai
    manjil asan nahi
    pr lautega vo liye sath usko
    rakh bharosa
    ye yaki hai mujko ye yaki hai tujko

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