Posts

मनोज कुमार झा : हर भाषा में जीवित-मृत असंख्य लोगों की सांस बसती है

पढ़ते हुए 3 : गंदी बात @ क्षितिज रॉय

शहर डायरी : पारो के लिए 

रोमियो ओ रोमियो

जब तक आदमी का होना प्रासंगिक है कविता भी प्रासंगिक है - कुमार मुकुल

पढ़ते हुए 2 : गीत चतुर्वेदी, न्यूनतम मैं !

पढ़ते हुए, एक : रंजन बाबू के गाँव में

मील के पत्थर

पटना में चल रही ग़ैर-कविताओं और यहाँ के अ-कवियों के बारे में सोचते हुए कविता के एक ठेकेदार के रफ़ नोट्स - अंचित

आज चंद्र्ग्रहण है - निशान्त

जब तक आदमी का होना प्रासंगिक है कविता भी प्रासंगिक है - कुमार मुकुल