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Nolan's Dunkirk : of misery, melancholy and Hope!

और क्या देखनें को बाकी है

बैठक : भीष्म साहनी चैप्टर.

बारिशों के जानिब

"हम लौटेंगे हजारों लाखों की तादाद में " - भविष्य को उम्मीद से देखता स्पार्टाकस

वीडियो एडिटिंग -निशांत 

मील के पत्थर

पटना में चल रही ग़ैर-कविताओं और यहाँ के अ-कवियों के बारे में सोचते हुए कविता के एक ठेकेदार के रफ़ नोट्स - अंचित

आज चंद्र्ग्रहण है - निशान्त

जब तक आदमी का होना प्रासंगिक है कविता भी प्रासंगिक है - कुमार मुकुल