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"विद यु विदआउट यु " के लेखक प्रभात रंजन से शुभम की बातचीत

'वो बात जिसका फ़साने में जिक्र न था/वो बात उनको बहुत नागवार गुज़री है'- कुमार राहुल

गौरव अदीब की कविताएँ

कुँवर नारायण : बाक़ी बची दुनिया उसके बाद का आयोजन है- निशान्त रंजन

YUVA KAVITA #15 SMRITI CHOUDHARY - A PROSE POEM OF SORTS

मील के पत्थर

किसी तस्वीर में दो साल - उपांशु

पटना में चल रही ग़ैर-कविताओं और यहाँ के अ-कवियों के बारे में सोचते हुए कविता के एक ठेकेदार के रफ़ नोट्स - अंचित

युवा कविता #5 अभिषेक