युवा कविता #19 अमृतेश बाबू

 अमृतेश अभी स्नातक के छात्र हैं. उंनका मानना है कि-
दिल और मन का योग संयोग से होता है,उस संयोग से कुछ शब्द निकलते हैं।
वही कविता है।

1.

धड़कने,शोहबते,आँखे,
जब घूरेंगी,
तब प्यार हो जाएगा,
इस शहर से तुमको।

साइकल की घण्टी से,
जो नींद खुलती है तेरी,
शहर के जागने से पहले,
शहर को देखना,जागकर,
तब प्यार हो जाएगा
इस शहर से तुमको।

ये जो चमकती दुकानें हैं, दीवारें काली नज़र आएगी
पीछे से कभी देखना उनको,
उस धुयें को महसूस करना जिसकी वज़ह से
काली हैं ये दीवारें

तब प्यार हो जाएगा
इस शहर से तुमको


2.

बहुत आसान है
राख-धुँए
के में बगल
चिंगारी का सृजन,
हल्के से झोकें
की जरूरत है
ठंढ से ठिठुरते,
उस गाँव को,

पिघले लौह भुजाओं में
तार के पँखे भी हैं
पँख फड़फड़ाने वाले
मक्खी भी बहुत हैं
कतार में,

पिघले लौह भुजाओं
को जमने से फुरसत कहाँ!
और हाँ!
गाँव वालों का
मक्खियों पर उम्मीद
अब भी क़ायम है।