युवा कविता #20 विष्णु पाठक

(विष्णु ने अपने लिखने के बारे में अंग्रेज़ी में कुछ भेजा था. यह इतना अच्छा और ईमानदार था कि लगा कि इसका अनुवाद इसकी आत्मा के साथ खिलवाड़ करना होगा, जो निश्चल है- वैसे ही जगत को मिले - मॉडरेटर)

 It was never about writing poems at first. My journey started with enjoying poems especially Urdu, then Hindi, English and a very little bit of Sanskrit & Persian.
I will read a poet, then get details of the poet, then I will get some keywords while reading about, for example if you read Nirala, you will know Chayavaad. If you read Daag Dehlvi, it will introduce you to two eras of Urdu poetry and since when Ghazals rules and structure started to be lenient and then we meet the Dushyant from Hindi ghazals.
Some names, crossed accidentally on poetry websites and I am glad they did like Carrol Ann Duffy and Nazeer Akbarabadi, and the journey continued.

In the process of reading, poetry started knocking my doors as well and I started scribbling.
Truth is first entire set of poems or so-called poems I wrote, all of them I disliked or preciously disqualified them as poems after a period, others would have already disqualified my poems but I took time, sadly.
But the journey is never ending and writing is a part of that for sure.
Now second inning has started, reading from books, meeting new people, going to events and I am very sure when third round starts after learning more and more; hardly few of my current poems will survive.
I am happy this way, I will keep writing, discarding.
Since class 7th Hindi was not in my curriculum and Hindi poetry is giving me a a second chance.
Poetry always comes to me, I don’t know how to reach out to it, hence I wait, until it says write now!
If you give me a subject and say, hey write me a poem, like you ask a Painter to paint, I can’t, maybe that’s why I am a newbie, but I love it this way 🙂
Poetry helps, it connects you to yourself and to soulful people around, it brings colors to life.




 "मौत" ! मौत विश्वास कर तेरा डर है मुझे मुझे यूँ अक्सर न डरा कहीं ये डर मिट गया तो मुलाक़ात भी बेमजा हो जाएगी मौत मत खेल ये खेल मुझसे मुझे पसंद नहीं लुकाछुपी एकांत मे सहम जाउंगा मौत इत्मिनान रख विश्वास कर तू कतार मे है, तब तक इंतेज़ार कर, लुत्फ़ उठा मेरी खट्टी मीठी ज़िन्दगानी का !!


 यात्रा वृतांत - बनारस आधी रात, तंग गली, वो सफ़र ठंड, पसीना, घबराहट फिर गंगा स्नान, उनका खादी का कपड़ा घी, चंदन, देवदार, आम और वो गट्ठर, मुंडन, कर्मकांड अग्नि, लपटें, ताप सच, निस्थुर, निर्मम औघड़, मैं और राख गंगा स्नान, सबका चाय,चर्चा, विलाप ख़रीद गरुड़ पुराण, प्रस्थान पूर्णविराम |



मध्यरात्रिचांद-1 मेरी बारी के खत्म होने पर मध्यरात्रि के चांद ने मुझसे कहा, मित्र, तुम कल आना मेरे ज़ख्म बेहतर दिखेंगे कल पूर्णिमा है| मध्यरात्रिचांद-2 कल न मिलने पर मध्यरात्रि के चांद ने कहा मुझसे, मित्र, तुम आए नही, क्यूँ ? "उनकी आँखों मे डूबा रहा" झिझकते हुए, कहा मैंने चाँद मुस्कुराया, बोला, नये ज़ख्म ! पूरे हों, तो कहना, मिलेंगे दो हफ्ते में पूर्णिमा है| मध्यरात्रिचांद-3 आज पूर्णिमा है, मेरे मित्र मध्यरात्रि के चांद ने पूरी कर ली है परिक्रमा पृथ्वी की और मैंने भी प्रेयसी की किन्तु दोनों अतृप्त, मैं मुस्कुरा रहा हूँ , हम दोनों मुस्कुरा रहे हैं अभी शेष हैं पूर्णिमा के कई चक्र | मध्यरात्रिचांद-4 मैं स्तब्ध था, बिल्कुल स्तब्ध और वो भी, मेरे मित्र मध्यरात्रि के चांद ने कहा मुझसे, लाँघ कर, स्पर्श रेखा की सीमा ये कौन टकरा गया है पूर्णिमा के चक्र से ? मैं मुस्कुराया बोला, एक बिंदु ! जो केंद्र थी पूर्णिमा के प्रथम चक्र में| मध्यरात्रिचांद-5 उदीयमान सूर्य के पीछे डूबने वाला चाँद क्या आपने देखा है? मैं अक्सर देखता हूँ मेरे मित्र, मध्यरात्रि के चाँद को |