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युवा कविता #22 : सलमान अशहदी साहिल

सलमान शायरी का रियाज़ करने में यक़ीन रखते हैं और काफ़ी गम्भीरता से इस काम में लगे रहते हैं.


1.

वो रात हो के दिन हो के फिर सुब्ह शाम हो
मेरी ज़बां पे सिर्फ तुम्हारा ही नाम हो

जो पैकरे वफ़ा हो मोहब्बत के बाब में
वो शख़्स राहे इश्क़ में सबका इमाम हो

आवारा गर्दी उस से ज़्यादा करेगा कौन
दाग़े जुनून जिसका हमेशा से काम हो

मत खोल अपना मुंह तु मोहब्बत की बात पर
ऐ मुनकिरीने इश्क़ ज़बां पर लगाम हो

सलमान की ग़ज़ल पे कभी दाद तुम न दो
बस ये दुआ करो के उसे इश्क़ ताम हो


2.

मैं मोहब्बतों का सफ़ीर हूं मैं मोहब्बतें ही पढ़ाउंगा
ये जो नफ़रतों का हुजूम है इसे मैं सिरे से मिटाउंगा

मेरे शहरे अम्न के हाकिमों !! तेरे दस्ते ज़ुल्म को तोड़ कर जो परिंदे
तेरे क़फ़स में हैं, उसे मैं रेहाई दिलाऊँगा.

जहां अम्न हो जहां चैन हो जहां दोसती की दिया जले
जहां नफ़रतों की जगह न हो मैं एक ऐसा शह् बसाउंगा

मेरे दोस्ता!! मुझे बख़्श दे, ये फ़लक को सर पे तो मत उठा
ये लो कान मैंने पकड़ लिया तुम्हें अब कभी न सताउंगा

किसी गांवों में किसी शहर में किसी उजड़े बिछड़े दियार में
कोई राह चलते भटक गया हो तो रास्ता मैं दिखाऊंगा

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युवा कविता #20 विष्णु पाठक

(विष्णु ने अपने लिखने के बारे में अंग्रेज़ी में कुछ भेजा था. यह इतना अच्छा और ईमानदार था कि लगा कि इसका अनुवाद इसकी आत्मा के साथ खिलवाड़ करना होगा, जो निश्चल है- वैसे ही जगत को मिले - मॉडरेटर)

It was never about writing poems at first. My journey started with enjoying poems especially Urdu, then Hindi, English and a very little bit of Sanskrit & Persian.
I will read a poet, then get details of the poet, then I will get some keywords while reading about, for example if you read Nirala, you will know Chayavaad. If you read Daag Dehlvi, it will introduce you to two eras of Urdu poetry and since when Ghazals rules and structure started to be lenient and then we meet the Dushyant from Hindi ghazals.
Some names, crossed accidentally on poetry websites and I am glad they did like Carrol Ann Duffy and Nazeer Akbarabadi, and the journey continued.

In the process of reading, poetry started knocking my doors as well and I started scribbling.
Truth is first entire set of poems or so-called poems…

युवा कविता #16 नीरज प्रियदर्शी

नीरज प्रियदर्शी परवरिश भोजपुर के गांव में हुई है, इसीलिए रंग दिखता है । पिता अब दर्शनशास्त्र के लेक्चरर हैं।तब ठेठ किसान थे। इन्हीं की सोहबत ने पहले पढ़ना सिखाया और फिर लिखना। अब तो उम्मीद भी करने लगे हैं। कहते हैं- कुछ भी लिखो, मगर ऐसा लिखो कि वो कागज किसी के हाथ आए तो आईने सा लगे। तुम्हारे खुद के भी । जब भी लिखता हूं, किसी न किसी के वास्ते ही लिखता हूं। और वास्ते का क्या है! किसी से भी हो जाता है। पेशे से पत्रकार हूं। हर दफे बस यही चाहता हूं कि कागज पर सिर्फ कविताएँ लिखूं, मगर नौकरी ने उसी कागज पर लूट, हत्या और बलात्कार लिखवा दिए। अब नौकरी छोड़ दी है। मन का लिखता हूं। मन करता है हर बार कविता ही लिखूं। विचार अघोर है, सो हर बार प्रेम पर अटक जाता है । हर बार प्रेम भी हो जाता है।







मुमकिन नहीं था 'के मुमकिन नहीं था तुम्हारा आना फिर से उदास कमरे में ये सिर्फ हम नहीं वरन, समझती है हमारी रात भी मुझसे ही खफा है घुप्प बैठी है मुझसे पूछ के सिर्फ़ मेरी ही होकर कैसे गुजर सकती है जबकि पहर बाकी है अभी। शहर छोटा है जब सोता है तब ख्वाब बुनता है और जुगत भिड़ाता है इक और शहर बनाने क…

"विद यु विदआउट यु " के लेखक प्रभात रंजन से शुभम की बातचीत

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1. आपको पहली किताब की बधाई। आप अपने बारे में और अपनी किताब के बारे में हमें कुछ बताएं।

उत्तर- धन्यवाद। मैं भारतीय रेल में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हूँI विद यू विदाउट कहानी है सच्चे प्यार और सच्ची दोस्ती की परिभाषा गढ़ते, उसे तलाशते और उसे अपने हिसाब से जीते निशिन्द,आदित्य और रमी की। ‘बचपन की अल्हड़ता’ और ‘व्यस्क होने पर की गम्भीरता’ के बीच पनपी दो प्रेम कहानियाँ जो आपस में उलझ कर सम्पूर्णता की चाह में मानवीय रिश्तों के भीतर और बाहर के तमाम अन्तर्द्वन्द से जद्दोजहद करते हुए जीवन के कई यक्ष प्रश्नों का साक्षात्कार करती हैं और उनके उत्तर ढून्ढती हैं।

2. विद यु विदाउट यु कैसी उपन्यास है? यह किस तरह के पाठकों के लिए है? हिंदी किताब का इंग्लिश शीर्षक... इस विषय पर आपकी कोई राय?

उत्तर- वस्तुत यह एक लव ट्रायंगल है लेकिन यह फ़िल…